यशोदानंदन  

  • यशोदानंदन का कुछ भी विवरण ज्ञात नहीं है।
  • 'शिवसिंह सरोज' में इनका जन्म संवत 1828 लिखा हुआ मिलता है।
  • इनका एक छोटा सा ग्रंथ 'बरवै नायिका भेद' ही मिलता है जो नि:संदेह अनूठा है और रहीम के काव्य से अच्छा नहीं तो उसकी टक्कर का है।
  • इनमें 9 बरवै संस्कृत में और 53 अवधी भाषा में हैं।
  • अत्यंत मृदु और कोमल भाव अत्यंत सरल और स्वाभाविक रीति से व्यंजित हैं।
  • भावुकता ही कवि की प्रधान विभूति है। भावुकता की दृष्टि से इनकी छोटी सी रचना बहुत ही बड़ी बड़ी रचनाओं से मूल्य में बहुत अधिक है।
  • कवियों की श्रेणी में ये नि:संदेह उच्च स्थान के अधिकारी हैं।

संस्कृत
यदि च भवति बुधामिलनं किं त्रिादिवेन।
यदि च भवति शठमिलनं किं निरयेण

भाषा

अहिरिनि मन कै गहिरिनि उतरु न देइ।
नैना करै मथनिया, मन मथि लेइ
तुरकिनि जाति हुरुकिनी अति इतराइ।
छुवन न देइ इजरवा मुरि मुरि जाइ
पीतम तुम कचलोइया हम गजबेलि।
सारस के असि जोरिया फिरौं अकेलि


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