सिलिकॉन  

सिलिकॉन
चमकीला क्रिस्टल

Silicon-Spectra.jpg
सिलिकॉन की वर्णक्रम रेखाएँ
साधारण गुणधर्म
नाम, प्रतीक, संख्या सिलिकॉन, Si, 14
हिन्दी नाम सैकता
तत्व श्रेणी उपधातु
समूह, आवर्त, कक्षा 14, 3, p
मानक परमाणु भार 28.0855g·mol−1
इलेक्ट्रॉन विन्यास 1s2 2s2 2p6 3s2 3p2
इलेक्ट्रॉन प्रति शेल 2, 8, 4
भौतिक गुणधर्म
अवस्था ठोस
घनत्व (निकट क.ता.) 2.3290 g·cm−3
तरल घनत्व
(गलनांक पर)
2.57 g·cm−3
गलनांक 1687 K, 1414 °C, 2577 °F
क्वथनांक 3538 K, 3265 °C, 5909 °F
संलयन ऊष्मा 50.21 किलो जूल-मोल
वाष्पन ऊष्मा 359 किलो जूल-मोल
विशिष्ट ऊष्मीय
क्षमता
19.789

जूल-मोल−1किलो−1

वाष्प दाब
P (Pa) 1 10 100 1 k 10 k 100 k
at T (K) 1908 2102 2339 2636 3021 3537
परमाण्विक गुणधर्म
ऑक्सीकरण अवस्था 4, 3 , 2 , 1, -1, -2, -3, -4
(उभयधर्मी ऑक्साइड)
इलेक्ट्रोनेगेटिविटी 1.90 (पाइलिंग पैमाना)
आयनीकरण ऊर्जाएँ
(अधिक)
1st: 786.5 कि.जूल•मोल−1
2nd: 1577.1 कि.जूल•मोल−1
3rd: 3231.6 कि.जूल•मोल−1
परमाण्विक त्रिज्या 111 pm
सहसंयोजक त्रिज्या 111 pm
वैन्डैर वाल्स त्रिज्या 210 pm
विविध गुणधर्म
चुम्बकीय क्रम प्रतिचुम्बकीय
वैद्युत प्रतिरोधकता (20 °C) 103Ω·m
ऊष्मीय चालकता (300 K) 149 W·m−1·K−1
ऊष्मीय प्रसार (25 °C) 2.6 µm·m−1·K−1
ध्वनि चाल (पतली छड़ में) (20 °C) 8433 m.s-1
यंग मापांक 185 GPa
अपरूपण मापांक 52 GPa
स्थूल मापांक 100 GPa
पॉयज़न अनुपात 0.28
मोह्स कठोरता मापांक 7
सी.ए.एस पंजीकरण
संख्या
7440-21-3
बैंड गैप ऊर्जा
300 केल्विन पर
1.12 eV
समस्थानिक
समस्थानिक प्रा. प्रचुरता अर्द्ध आयु क्षरण अवस्था क्षरण ऊर्जा
(MeV)
क्षरण उत्पाद
28Si 92.23% 28Si 14 न्यूट्रॉन के साथ स्थिर
29Si 4.67% 29Si 15 न्यूट्रॉन के साथ स्थिर
30Si 3.1% 30Si 16 न्यूट्रॉन के साथ स्थिर
32Si ट्रेस 170 y β 13.020 32P

सिलिकॉन (अंग्रेज़ी:Silicon) आवर्त सारणी के चतुर्थ समूह का दूसरा अधातु तत्व है। सिलिकॉन के तीन स्थायी समस्थानिक होते है, जिनके परमाणु भार क्रमश: 28.29 है। यह स्वतंत्र अवस्था में नहीं मिलता।

सिलिकॉन डाई ऑक्साइड अथवा सिलकन को वैज्ञानिक प्राचीन काल से तत्व मानते आए हैं। सर्वप्रथम फ्रांसीसी वैज्ञानिक लेवाजिये ने यह बताया कि यह तत्व न होकर ऑक्साइड यौगिक है। 1823 ई. में स्वीडन के रसायन व बर्जीलियस ने इस तत्व के पोटैशियम सिलिको फ्लोराइड (K2SiF6) का पोटैशियम धातु द्वारा अपचयन कर प्राप्त किया। 1854 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक सांत क्लेर देविल ने इसे विशुद्ध अवस्था में तैयार किया।

उपस्थिति

भूपर्पटी का चौथाई भाग सिलिकॉन है। यह ऑक्सीजन के बाद सबसे अधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है और संयुक्त अवस्था में प्राय: सभी स्थानों में पाया जाता है। ऑक्सीजन जन से संयुक्त केवल सिलिकॉन डाईऑक्साइड (SiO2) है। रेत अथवा सिलिकेट्स के रूप में पत्थरों, मिट्टी तथा खनिज पदार्थों में सिलिकॉन सर्वदा उपस्थित है। अनेक पौधों तथा पशु शरीर में भी यह मिलता है।

निर्माण

विद्युत भट्ठी में कार्बन द्वारा सिलिकॉन के डाईआक्साइड को अपचन कराकर सिलिकॉन प्राप्त किया जाता है। ऐलुमिनियम, पोटैशियम या जिंक की सिलिकॉन क्लोराइड (SiCl4) पर क्रिया द्वारा भी सिलिकॉन तत्व बनाया गया है। रक्त तप्त टेंटेलम पर सिलिकॉन क्लोराइड के विघटन द्वारा विशुद्ध अवस्था में सिलिकॉन प्राप्त होता है।

गुण

विशुद्ध सिलिकॉन मिलना कठिन है। अन्य तत्वों की सूक्ष्म मात्रा द्वारा इसके गुणों में बहुत अंतर आ जाता है, जिसके कारण विभिन्न विधियों से प्राप्त सिलिकॉन के गुण भिन्न-भिन्न ही मिलते हैं। विशुद्ध सिलिकॉन के कुछ स्थिरांक जैसे संकेत (Si) परमाणु संख्या 14, परमाणु भार 28.086, गलनांक 1410° सें., क्वथनांक 2680° सें., घनत्व 2.33 ग्राम प्रति घ. सेंमी. परमाणु व्यास 1.32 एंगस्ट्राम, विशिष्ट ताप 0.162 कैलोरी और वर्तनांक 4.24 हैं। सिलिकॉन क्रिस्टलीय और अक्रिस्टलीय दोनों अवस्थाओं में मिलता है। क्रिस्टल सिलिकॉन में धातु की सी चमक और विद्युत चालकता होती है। यह काँच से भी कठोर है।

सिलिकॉन जल या साधारण अम्लों से प्रभावित नहीं होता। केवल हाइड्रोफ्लोरिक अम्ल की क्रिया द्वारा फ्लोरोसिलिसिक अम्ल (H2SiF6) बनाता है। उबलते क्षार के विलयन की अभिक्रिया द्वारा सिलिकेट बनता है। फ्लोरीन तथा क्लोरीन गैस सिलिकॉन से शीघ्र किया कर क्रमश: सिलिकॉन फ्लोराइड (SiF4) और सिलिकॉन क्लोराइड (SiCl4) बनाते हैं। उच्च ताप पर ऑक्सीजन, जलवाष्प तथा अनेक धातुएँ सिलिकॉन से अभिक्रिया करती हैं।

सिलिकॉन चतुर्थ समूह का तत्व होने के कारण कार्बन से अनेक गुणों में मिलता-जुलता है। सिलिकॉन परमाणु के बाहरी कक्ष में चार इलेक्ट्रॉन हैं। ये इलेक्ट्रॉन अन्य तत्वों के इलेक्ट्रॉनों से मिलकर चार सहसंयोजक बंध बनाते हैं। इन बंधों में कार्बन से अधिक आयनिक गुण वर्तमान हैं। फिर भी इसके सहसंयोजक बंध बनाते हैं। इस बंधों में कार्बन से अधिक आयनिक गुण वर्तमान हैं। फिर भी इसके सहसंयोजक गुण प्रधान होते हैं। कभी-कभी चार संयोजकता से अधिक के यौगिक भी मिलते हैं।


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