भारतकोश के संस्थापक/संपादक के फ़ेसबुक लाइव के लिए यहाँ क्लिक करें।

आयी देखत मनमोहनकू -मीरां  

Icon-edit.gif इस लेख का पुनरीक्षण एवं सम्पादन होना आवश्यक है। आप इसमें सहायता कर सकते हैं। "सुझाव"
आयी देखत मनमोहनकू -मीरां
मीरांबाई
कवि मीरांबाई
जन्म 1498
जन्म स्थान मेरता, राजस्थान
मृत्यु 1547
मुख्य रचनाएँ बरसी का मायरा, गीत गोविंद टीका, राग गोविंद, राग सोरठ के पद
इन्हें भी देखें कवि सूची, साहित्यकार सूची
मीरांबाई की रचनाएँ
  • आयी देखत मनमोहनकू -मीरां

आयी देखत मनमोहनकू। मोरे मनमों छबी छाय रही॥ध्रु.॥
मुख परका आचला दूर कियो। तब ज्योतमों ज्योत समाय रही॥2॥
सोच करे अब होत कंहा है। प्रेमके फुंदमों आय रही॥3॥
मीरा के प्रभु गिरिधर नागर। बुंदमों बुंद समाय रही॥4॥


संबंधित लेख

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=आयी_देखत_मनमोहनकू_-मीरां&oldid=214954" से लिया गया