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शौर्य स्मारक, भोपाल

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शौर्य स्मारक, भोपाल

शौर्य स्मारक (अंग्रेज़ी: Shaurya Smarak) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में स्थित एक युद्ध स्मारक है। शौर्य स्मारक का उद्घाटन भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 अक्टूबर 2016 को किया था। इस स्मारक का निर्माण मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भोपाल के अरेरा हिल्स क्षेत्र में एमपी नगर के पास किया गया है। शौर्य स्मारक लगभग 12.67 एकड़ के क्षेत्र में फैला हुआ एक भव्य स्मारक है। इस स्मारक को देश के वीर सैनिकों को समर्पित किया गया है। सिपाही और स्वतंत्रता सैनानियों के बलिदान की कहानी और उनके योगदान को कल्पनाशील और दिलचस्प वास्तुशिल्प प्रतिष्ठानों को संजोते हुए चित्रित किया गया है।

परिचय

यह स्थान एक सार्वजनिक पार्क के रूप में बनाया गया हैं। यहाँ भारी तादाद में पर्यटक घूमने आते हैं। इस पार्क में भारतीय नौसेना, थल सेना और वायु सेना का बहुत मनोहर चित्रण किया गया है। सेना को ग्रेनाइट, एयर फोर्स इन व्हाइट और द नेवी इन ग्रे द्वारा हस्ताक्षरित किया गया है। शौर्य स्तम्भ के नजदीक में ही स्मारक ज्योति है जो शहीदों को सम्मान देने के लिए होलिका ज्योति के रूप में प्रज्जवलित की जाती है। पार्क में एक लाल रंग की मूर्तिकला भी स्थापित है, जिसे पार्क की मुख्य धुरी से देखने पर यह नमस्कार करते हुए प्रतीत होती है लेकिन जब इसे दूसरी धुरी से देखा जाता है तब यह ‘ए ड्रॉप ऑफ ब्लड’ की तरह प्रतीत होती हैं। पार्क में एक भूमिगत संग्रहालय भी स्थापित किया गया है जिसमें सैनिकों की याद में समर्पित दीर्घाएँ हैं। जिसमें भारत की पाकिस्तान और चीन के साथ हुए युद्ध के दौरान की वीरता को प्रदर्शित किया गया है। पार्क में टीपू सुल्तान और महाराणा प्रताप जैसे वीर नायकों के अलावा भी अन्य ऐतिहासिक शूरवीरों को प्रदर्शित किया गया है।

संरचना

शौर्य स्मारक को मुंबई के एक वास्तुकार शोना जैन के द्वारा डिजाइन किया गया था। शौर्य स्मारक में युद्ध स्थल से जुडी हुई तमाम जानकारी इस परिसर के भीतर पर्यटकों के आकर्षण के लिए विशेष हैं। शौर्य स्मारक की वास्तुकला को महाभारत और रामायण के प्राचीन काल के साथ ही भारत के ऐतिहासिक समय दौरान हुए युद्ध और दृश्यों को ध्यान में रखते हुए डिज़ाइन किया गया है। शौर्य स्मारक में बहुत सारी अनूठी विशेषताएँ विधमान हैं। जो इसे आकर्षण का केंद्र बनाती है और यहां आने वाले पर्यटकों को देशभक्ति की प्रेरणा देती है। इस स्मारक की बनाबट एक पारंपरिक हिंदू मंदिर की स्थापना शैली से मेल खाती हुई प्रतीत होती हैं। इसमें कई कक्ष बनाए गए है, एक गर्भगृह हैं और एक मुख्य कक्ष हैं जो मंदिरों में पाया जाता है। इसी कक्ष में सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जाती है और युद्ध के दौरान दुश्मनों से लड़ते हुए अपनी जान गवाने वाले सैनिकों के सम्मान में जाने वालो के लिए यह अंतिम कक्ष है।

यहां बने 62 फुट ऊँचे स्तंभ में सैनिकों के नाम के शिलालेख बने हुए हैं। यहां शहीदों के प्रति सम्मान जताने के लिए प्रकाश जलाया जाता है। यह स्तंभ उन तमाम वीर सैनिकों के जीवन का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने देश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन को समर्पित कर दिया है। स्मारक में मृत्यु पर विजय प्राप्ति और आत्मा की मुक्ति के पहलुओं को भी दर्शाया गया है। युद्ध के दौरान की गंभीरता और खुरदरापन का बहुत ही मनोहर चित्रण यहां देखने को मिल जाएगा।

विशेषताएँ

  • शौर्य स्मारक में 62 फिट ऊँचा एक स्तंभ है जिसे प्रतीकवाद का उपयोग कर बनाया गया है और इसमें वीर शहीदों के नाम लिखे गए हैं।
  • इस पार्क में स्तंभ के नीचे लाल स्थान है जोकि रक्त को दर्शाता है और सफेद संगमरमर जीवन का प्रतीक है।
  • स्मारक परिसर के अंदर एक अखाड़ा भी बनाया गया है जो इतिहास की समय रेखा और मानव के जीवन के लिए खंडरों पर युद्ध को दर्शाता है।
  • शौर्य स्मारक भगवत गीता में श्रीकृष्ण के द्वारा बताए गए जीवन, मृत्यु और आत्मा की अनंतता के बारे में भी संदेशों के साथ निर्मित किया गया है।
  • स्मारक में बने मेमोरियल संग्रहालय में रामायण, महाभारत और कलिंग युद्ध के अलावा भी कई अन्य युद्ध के चित्र हैं। इसमें उन युद्धों को भी दर्शाया गया है जो आजादी के बाद लड़े गए थे।
  • स्मारक में उन तमाम वीर सिपाहियों के चित्रों की गैलरी भी है जिन्होंने परमवीर चक्र को धारण किया है।
  • यहा आपको युद्ध क्षेत्र के लघु मॉडल भी देखने को मिल जाएंगे।
  • शौर्य स्मारक में प्रकाश और ध्वनि के माध्यम से युद्ध में अपने प्राण गवाने वाले वीर सैनिकों की कहानी को बयां किया गया है।
  • स्तम्भ में सैनिकों के असली जूतों को रखा गया है।
  • शौर्य स्मारक के अंदर भोजन करने की अनुमति नही है, इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें कि युद्ध परिसर के अंदर भोजन नहीं कर सकते हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

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