कोहिमा  

कोहिमा
कैथोलिक चर्च, कोहिमा
विवरण कोहिमा नागालैंड राज्य की राजधानी है। कोहिमा शहर पूर्वोत्तर भारत में दीमापुर स्थित रेलमार्ग के दक्षिण-पूर्व में 48 किमी दूर नागा पहाड़ियों पर स्थित है।
राज्य भारत
ज़िला दीमापुर
भौगोलिक स्थिति उत्तर- 25° 40′ 12″, पूर्व- 94° 7′ 12″ E
कैसे पहुँचें हवाई जहाज़, रेल, बस आदि से पहुँचा जा सकता है।
हवाई अड्डा दीमापुर विमानक्षेत्र में हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है।
रेलवे स्टेशन दीमापुर रेलवे स्टेशन निकटतम रेलवे स्टेशन है।
यातायात बस, टैक्सी आदि
क्या देखें राज्य संग्राहलय, एम्पोरियम, नागा हेरिटेज कॉम्पलैक्स,
कहाँ ठहरें होटल, गेस्ट हाउस
ए.टी.एम लगभग सभी
Map-icon.gif कोहिमा गूगल मानचित्र
अन्य जानकारी नागालैंड को यहां की समृद्ध और जीवंत संस्‍कृति के लिए जाना जाता है और पर्यटक, कोहिमा में इस संस्‍कृति की झलक स्‍पष्‍ट रूप से देख सकते हैं।

कोहिमा नागालैंड राज्य की राजधानी है। कोहिमा शहर पूर्वोत्तर भारत में दीमापुर स्थित रेलमार्ग के दक्षिण-पूर्व में 48 किमी दूर नागा पहाड़ियों पर स्थित है। कोहिमा शहर में नागालैंड विश्वविद्यालय भी है। कोहिमा में अधिकतर आदिवासी रहते हैं।

इतिहास

कोहिमा के अधिकाश: भागों में हमेशा नागा जनजाति ने निवास किया है। इस जगह पर 1840 में ब्रिटिश आए थे, जिन्‍होने नागा जनजाति के कड़े प्रतिरोध का सामना किया था। चार दशकों के लम्‍बे विरोध और झड़प के बाद, ब्रिटिश प्रशासकों ने इस क्षेत्र पर आधिपत्‍य स्‍थापित कर लिया था और कोहिमा को नागा पहाड़ी जिले का प्रशासनिक मुख्‍यालय बना लिया, जो उस समय असम का हिस्‍सा हुआ करता था। 1 दिम्‍बर 1963 को, कोहिमा को नागालैंड राज्‍य की राजधानी बना दिया गया। नागालैंड, भारत के संघ में 16 वां राज्‍य था।[1]

कोहिमा, कई कट्टर लड़ाईयों की गवाह है, द्वितीय विश्‍व युद्ध के दौरान आधुनिक जापानी सेना और अन्‍य मित्र देशों के बीच होने वाले कोहिमा का युद्ध और टेनिस कोर्ट की लड़ाई, कोहिमा ने देखी है। यहां यह है कि वर्मा अभियान ने जापानी साम्राज्‍य के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक दी और दक्षिण पूर्व एशिया में युद्ध का पूरा अर्थ ही बदल दिया। जहाँ तक जापानी ब्रिटिश भारत में प्रवेश कर पाए थे। 1944 में कुछ समय के लिए यहाँ जापानी टुकड़ियों का क़ब्ज़ा रहा था, फिर अंग्रेज़ों ने इसे वापस हासिल कर लिया। साथ ही यह भी कहा जा सकता है कि मित्र देशों की सेना, जापान की उन्‍नति को रोकने में सक्षम थे। कोहिमा युद्ध स्‍थल को राष्‍ट्रमंडल युद्ध समाधि प्रस्‍तर आयोग के द्वारा बनाया गया था, जो यहां आने वाले सभी पर्यटकों के लिए प्रमुख आकर्षण का केंद्र है, जहां सौ से भी ज्‍यादा शहीद हुए सैनिकों की क़ब्र बनी है।

संस्‍कृति और पाक कला

नागालैंड के लोगों को और मुख्‍य रूप से कोहिमा के लोगों को उनके प्‍यार और आतिथ्‍य के लिए जाना जाता है और यहां आकर पर्यटकों को स्‍थानीय व्‍यंजनों को चखना नहीं भूलना चाहिए। यहां की नागा जनजाति को मांस और फिश बहुत अच्‍छी लगती है और यह लोग इसे बेहद खास तरीके से पकाते है जो वाकई में लोगों के मुंह में पानी ला देती है।

नागालैंड को यहां की समृद्ध और जीवंत संस्‍कृति के लिए जाना जाता है और पर्यटक, कोहिमा में इस संस्‍कृति की झलक स्‍पष्‍ट रूप से देख सकते हैं। नागालैंड में प्रत्‍येक और हर जनजाति के पास उसकी स्‍वंय की औपचारिक पोशाक होती है जो भिन्‍न रंगों के भाले, मृत बकरियों के बालों, चिडि़यों के पंखों और हाथी के दांतों आदि से निर्मित होती है।[1]

यातायात और परिवहन

वायु मार्ग

नागालैंड के दीमापुर विमानक्षेत्र में हवाई अड्डे का निर्माण किया गया है। यहाँ से कोहिमा तक पहुँचना काफ़ी आसान है।

रेल मार्ग

हवाई अड्डे के अलावा दीमापुर में रेलवे स्टेशन का भी निर्माण किया गया है। दीमापुर से कोहिमा मात्र 74 किमी की दूरी पर स्थित है।

कोहिमा, नागालैंड
सड़क मार्ग

कोहिमा बस अड्डा नागालैंड का सबसे व्यस्तम बस अड्डा है। यहाँ से नागालैंड के विभिन्न स्थानों के लिए बसों का परिचालन किया जाता है। बसों के अलावा राष्ट्रीय राजमार्ग 39 से निजी वाहनों द्वारा भी कोहिमा तक पहुँचा जा सकता है।

जनसंख्या

2001 की जनगणना के अनुसार कोहिमा शहर की जनसंख्या 78,584 है, और कोहिमा ज़िले की जनसंख्या 3,14,366 है।

पर्यटन

नागालैंड की राजधानी कोहिमा बहुत ख़ूबसूरत है। कोहिमा के आदिवासियों की संस्कृति बहुत रंग-बिरंगी है जो पर्यटकों को बहुत पसंद आती है। पर्यटकों को इन आदिवासियों की संस्कृति की झलक देखना बहुत पसंद है। इनकी संस्कृति के अलावा पर्यटक यहाँ पर कई बेहतरीन और ऐतिहासिक पर्यटक स्थलों की सैर भी कर सकते हैं। इनमें राज्य संग्राहलय, एम्पोरियम, नागा हेरिटेज कॉम्पलैक्स, कोहिमा गाँव, दजुकोउ घाटी, जप्फु चोटी, त्सेमिन्यु, खोनोमा गांव, दज्युलेकी और त्योफेमा टूरिस्ट गाँव प्रमुख हैं। यह सभी पर्यटकों को बहुत पसंद आते हैं और इनकी ख़ूबसूरत उन्हें मंत्रमुग्ध कर देती है।

दुनिया के विभिन्‍न हिस्‍सों से पर्यटक यहां आकर कोहिमा चिडि़याघर, राज्‍य संग्रहालय, जुफु चोटी की सैर अवश्‍य करते हैं। अगर आप कभी कोहिमा की सैर के लिए जाएं तो दझुकोउ घाटी और दझुलेकि झरना ज़रूर देखें। कोहिमा में स्थित कोहिमा कैथोलिक चर्च, पूरे देश में स्थित गिरिजाघरों में से सबसे बड़ा और सबसे सुंदर चर्च है। यह एक बेहतरीन पर्यटक स्‍थल भी है, इसे अवश्‍य देखना चाहिए।[1]

पर्यटकों के लिए इनर लाइन परमिट

यह ध्‍यान देने योग्‍य बात है कि कोहिमा, संरक्षित क्षेत्र अधिनियम के अंर्तगत आता है जहां घरेलू पर्यटकों को यात्रा करने के लिए आईएलपी ( इनर लाइन परमिट ) की आवश्‍यकता पड़ती है। इनर लाइन परमिट एक साधारण पर्यटन दस्‍तावेज है। विदेशी पर्यटकों को इनर लाइन परमिट की आवश्‍यकता नहीं पड़ती है, उन्‍हे कोहिमा के संरक्षित क्षेत्र में प्रवेश करने व भ्रमण करने के लिए खुद को जिले के विदेशी पंजीकरण अधिकारी ( एफआरओ ) के पास पंजीकृत कराना होता है, पंजीकरण कराने के 24 घंटे के अंदर ही विदेशी पर्यटक आराम से सैर कर सकते हैं।

घरेलू पर्यटक, इनर लाइन परमिट को इन स्‍थानों से भी प्राप्‍त कर सकते हैं -
  1. उप आवासीय आयुक्‍त,
  2. नागालैंड हाउस,
  3. नई दिल्‍ली उप आवासीय आयुक्‍त,
  4. नागालैंड हाउस,
  5. कोलकातागुवाहाटी और शिलांग में सहायक आवासीय आयुक्‍त दीमापुर,
  6. को‍हिमा और मोकोकचुंग के उप आयुक्‍त आदि।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. 1.0 1.1 1.2 कोहिमा पर्यटन - केवही फूलों की भूमि (हिन्दी) ने‍टिव प्‍लानेट। अभिगमन तिथि: 1 सितम्बर, 2016।

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