देवगिरि पहाड़ी  

देवगिरि पहाड़ी को मध्य प्रदेश में स्थित बताया गया है। एक स्थानीय अभिलेख के अनुसार चंबल नदी के तट पर बसे हुए 'अटेर' नामक क़स्बे के क़िले की पहाड़ी का नाम 'देवगिरि' है। यह अभिलेख भदौरिया राजा बदनसिंह का है।

देवगिरि पहाड़ी से सम्बन्धित और भी कई अन्य प्रसंग मिलते हैं, जिनमें देवगिरि पहाड़ी का उल्लेख किया गया है-

कालीदास का उल्लेख

कालिदास के 'मेघदूत'[1] में वर्णित एक पहाड़ी-

'नीचैर्वास्यत्युपजिगमिषोर्देवपूर्वंगिरिं ते, शीतोवायु: परिणमयिता काननोदंबराणाम्'

अर्थात् "हे मेघ (गंभीरा नदी के आगे हो जाने के पश्चात्) वन गूलरों को पकाने वाली शीतल वायु, देवगिरि नामक पहाड़ी के निकट जाने के इच्छुक तेरा साथ देगी।"

मेघ के यात्राक्रम के अनुसार देवगिरि की स्थिति, 'गंभीरा' (वर्तमान गंभीर) नदी और 'चर्मण्वती'[2] के बीच कहीं होनी चाहिए। चर्मण्वती या चंबल को पार करने के पश्चात् मेघ दशपुर पहुँचता है, जो पश्चिमी मालवा का मंदसौर है। इस प्रकार देवगिरि की स्थिति उज्जैन से मंदसौर के मार्ग पर और चंबल के दक्षिणी तट पर होनी चाहिए। इस पहाड़ी का अभिज्ञान अनिश्चित है। पूर्वमेघ[3] में इसी पहाड़ी पर कालिदास ने स्कंद का निवास बताया है-

'तत्र स्कंद नियतवसितम्'।

'बिहार-उड़ीसा रिसर्च सोसाइटी जर्नल' के दिसम्बर, 1915 के अंक में प्रकाशित[4] एक लेख के अनुसार गंभीरा के तीर पर अंजीर के वृक्षों के वन में होकर एक मार्ग है, जो लगभग एक 200 फुट ऊँचे पहाड़ पर जाकर समाप्त होता है। इस पहाड़ पर स्कंद का एक छोटा सा मंदिर है। मंदिर की देवमूर्ति की खांडेराव[5] के नाम से पूजा होती है। यह आश्चर्यजनक बात है कि कालिदास ने इस देवमूर्ति का नाम स्कंद कहा है। संभव है इसी पहाड़ी को कालिदास ने देवगिरि नाम से अभिहित किया हो।

श्रीमद्भागवत का उल्लेख

श्रीमद्भागवत[6] में उल्लिखित एक पर्वत का नाम-

'भारतेऽप्यस्मिन् वर्ष सरिच्छैला: सन्ति बहवोमलयोमंगलप्रस्थो मैनाकस्त्रिकूट ऋषभ, कूटक: काल्लंक: सह्यो देवगिरिर्ऋष्यमूक: वैकटो महेन्द्रो वारीधारी विंध्य:'।

संदर्भ से देवगिरि पहाड़ी दक्षिण भारत का कोई पर्वत जान पड़ता है। संभव है देवगरि की पहाड़ी का इस उद्धरण में उल्लेख हो। यह पहाड़ी समुद्र के तल से 2250 फुट ऊँची है। उपर्युक्त उद्धरण में, जिसमें पर्वतों के नाम शायद क्रमानुसार हैं, देवगिरि, ऋष्यमूक पर्वत के साथ उल्लिखित है, जिससे इसे दक्षिण भारत का ही पर्वत मानना ठीक होगा।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

ऐतिहासिक स्थानावली |लेखक: विजयेन्द्र कुमार माथुर |प्रकाशक: राजस्थान हिन्दी ग्रंथ अकादमी, जयपुर |पृष्ठ संख्या: 587 |

  1. पूर्वमेघ 44
  2. पूर्वमेघ 47-48
  3. पूर्वमेघ 45
  4. पृष्ठ 203
  5. (=स्कंदराज)
  6. श्रीमद्भागवत 5, 19, 16

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