करतोया नदी  

'करतोया समासाद्य त्रिरात्रोपोषितो नर:
अश्वमेधमवाप्नोति प्रजापतिकृतोविधि।[1]

  • करतोया का नाम अमरकोश[2] में भी है-'करतोया सदानीरा बाहुदा सैतवाहिनी' जिससे संभवत: सदानीरा एवं करतोया एक ही प्रतीत होती हैं।
  • कालांतर में करतोया को अपवित्र माना जाने लगा था और इसे कर्मनाशा के समान ही दूषित समझा जाता था। यथा 'कर्मनाश नदी स्पर्शात् करतोया विलंधनात् गंडकी बाहुतरणादधर्म: स्खलति कीर्तनात्' आनंद रामायण यात्राकांड।[3] जान पड़ता है कि बिहार और बंगाल में बौद्ध मतावलंबियों का आधिक्य होने के कारण इन प्रदेशों तथा इनकी नदियों को, पौराणिक काल में अपवित्र माना जाने लगा था।


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  1. वन पर्व महाभारत.85,3
  2. अमरकोश 1,10,33
  3. आनंद रामायण यात्राकांड 9,3

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  • ऐतिहासिक स्थानावली | पृष्ठ संख्या= 139| विजयेन्द्र कुमार माथुर | वैज्ञानिक तथा तकनीकी शब्दावली आयोग | मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार

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