सरदार सेवा सिंह  

सरदार सेवा सिंह थिकरीवाल पंजाब में सामाजिक और राष्ट्रीय क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रसिद्ध हैं।

परिचय

सरदार सेवा सिंह थिकरीवाल का जन्म 18 से 82 ईसवी में पटियाला रियासत में हुआ था। उन्होंने कुछ दिन रियासत में नौकरी की पर वहां मन नहीं लगा। मुझे छोड़कर सिख धर्म के प्रचार, गुरुद्वारों की स्थापना और सिक्ख समाज की कमजोरियों को दूर करने के काम में लग गये। उन्होंने मद्य निषेध का प्रचार किया और छुआछूत के विरुद्ध आवाज उठाई।

ननकाना और जलियांवाला बाग हत्याकांड से प्रभावित होकर सरदार सेवा सिंह 1921 में स्थापित अकाली दल में सम्मिलित हो गए। उसके बाद जब रियासतों में जन आंदोलन आरंभ हुआ तो वे प्रजामंडल में सम्मिलित हुए और अपने 500 साथियों के साथ 1929 की लाहौर कांग्रेस में भाग लिया। जब उनकी शक्ति रियासतों की जनता को देसी नरेशों के अत्याचारों से छुटकारा दिलाना तथा देश को दासता से मुक्ति दिलाने में लगी।

जेल

इसके बाद ही रियासत और ब्रिटिश सरकार की ओर से गिरफ़्तारी और जेल की सजा का सिलसिला आरंभ हो गया। अकाली दल के गैरकानूनी घोषित होने पर वे 1923 में 3 वर्ष के लिए लाहौर जेल में बंद रहे। वहां से छूटते ही पटियाला रियासत की पुलिस ने गिरफ्तार करके 3 वर्ष तक अपने जेल में रखा। वहां उन पर बहुत अत्याचार किए गए। इसके बाद भी जिन्द रियासत और कोलकाता में उन को बंदी बनाया गया।

निधन

अंतिम बार पटियाला में 1933 मे उन्हें फिर गिरफ़्तार किया और वहां की लंबी भूख हड़ताल के बाद देश और समाज के सेवक का 1935 में स्वर्गवास हो गया।[1]



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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 909 |

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