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रुक्मणि लक्ष्मीपति अम्माल  

रुक्मणि लक्ष्मीपति अम्माल (जन्म- 1891 मद्रास, मृत्यु- 1951) प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, समाज सेविका थी। उन्होंने डिप्टी स्पीकर का पदभार ग्रहण किया एवं मद्रास विधानसभा में पहुंचकर प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री बनीं।

परिचय

प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सेविका रुक्मणी लक्ष्मीपति अम्माल का जन्म 1891 ईसवी को मद्रास में हुआ था। उस समय लड़कियों की शिक्षा की ओर बहुत कम ध्यान दिया जाता था, किंतु रुकमणी के पिता ने उन्हें स्नातक स्तर की शिक्षा दिलाई। उन्होंने हिंदी उर्दू, लैटिन और फ्रेंच भाषाओं का ज्ञान प्राप्त किया। उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में समाज सेवा और विशेष रूप से महिलाओं की स्थिति को सुधारने के कार्यों को विशेष बल दिया।[1]

स्वतंत्रता सेनानी

रुक्मणी लक्ष्मीपति अम्माल गांधीजी, राजगोपालाचारी और सरोजिनी नायडू की प्रेरणा से वे स्वतंत्रता संग्राम में सम्मिलित हुईं। वे द्वितीय विश्वयुद्ध आरंभ होने पर 1940 की व्यक्तिगत सत्याग्रह में जेल गईं। अपने सभी आभूषण गांधीजी के हरिजनोद्धार फंड में देने के बाद उन्होंने 1931 में नमक सत्याग्रह में भाग लिया और जेल की सजा भोगी।1932 में सविनय अवज्ञा आंदोलन में भी वे गिरफ्तार हुईं।

पदभार

रुक्मणि लक्ष्मीपति स्पेनिश में कांग्रेस की टिकट पर मद्रास काउंसिल की सदस्य निर्वाचित की गईं। उसी वर्ष उन्हें कांग्रेस कार्य समिति का सदस्य भी बनाया गया।1937 में मद्रास असेंबली के लिए निर्वाचित होकर उन्होंने डिप्टी स्पीकर का पदभार ग्रहण किया। प्रदेश की स्वास्थ्य मंत्री बनीं।

विशेषताएं

लक्ष्मीपति अम्माल आजाद विचारों की महिला थीं। उन्होंने अंतरजातीय विवाह करके समाज के सामने एक आदर्श प्रस्तुत किया और उन्होंने उस वक्त शिक्षा प्राप्त की थी जब महिलाओं की शिक्षा के प्रति समाज में कोई ध्यान न्हीं दिया जाता था। वे राष्ट्र की सुदृढ़ता पर बल देती थीं। उनका मानना था कि पश्चिमी संस्कृति हमारे युवकों में मानसिक दास्तां की भावना भरती है, जब तक हम भीतर से सुदृढ़ नहीं हो जाते तब तक अंतर्राष्ट्रीयता की बात करना बेमानी है।

मृत्यु

प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी और समाज सेविका रुक्मणी लक्ष्मीपति अम्माल का 1951 में स्वर्गवास हो गया।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. भारतीय चरित कोश |लेखक: लीलाधर शर्मा 'पर्वतीय' |प्रकाशक: शिक्षा भारती, मदरसा रोड, कश्मीरी गेट, दिल्ली |पृष्ठ संख्या: 750 |

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