प्रयोग:यशी  

माणिक्य लाल वर्मा (Manikya Lal Verma )

उदयपुर कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष एवं स्वतंत्रता सेनानी माणिक्य लाल वर्मा का जन्म 1897 ई. में बिजौलिया (राजस्थान) ठिकाने के एक सामान्य कायस्थ परिवार में हुआ था। माणिक्य लाल वर्मा ने अपना जीवन एक अध्यापक के रूप में प्रारंभ किया, परंतु पथिक जी से संपर्क के बाद उन्होंने बिजौलिया किसान आंदोलन का नेतृत्व किया और किसानों के सामंतों के शोषण एवं उत्पीड़न का नेतृत्व किया और किसानों को सामंतों के शौषण एवं उत्पीड़न से मुक्त कराने का प्रयास किया।

  • बिजोलिया किसान आंदोलन में भाग लेने के कारण माणिक्य लाल वर्मा को उदयपुर राज्य से निष्कासित कर दिया गया था।
  • माणिक्य लाल वर्मा उदयपुर से निष्कासित होकर अजमेर आ गए और वहां पर उन्होंने प्रेस के माध्यम से प्रजामंडल आंदोलन का प्रचार किया।
  • माणिक्य लाल वर्मा ने अजमेर में रहते हुए मेवाड़ प्रजामंडल स्थापित करने की योजना बनाई।
  • मेवाड़ प्रजामंडल को संगठित करने में भी माणिक्य लाल वर्मा जी ने अनुकरणीय कार्य किया।
  • स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद वृह्त्तर राजस्थान के प्रधानमंत्री भी बने। इसके बाद 14 जनवरी, 1969 ई. को वर्मा जी का निधन हो गया।[1]
  • माणिक्यलाल वर्मा को समाज सेवा के क्षेत्र में भारत सरकार द्वारा सन 1965 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. पुस्तक- स्वतंत्रता सेनानी कोश (गाँधीयुगीन), लेखक- डॉ. एस.एल. नागोरी, श्रीमती कांता नागोरी, पृष्ठ संख्या- 254

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