गहपति  

गहपति बौद्ध युगीन समाज व्यवस्था में ब्राह्मण कालीन वैश्य से मिलते-जुलते लोग थे। इनके विषय में एक जगह कहा गया कि वे कलानिष्णात थे, और शिल्प-व्यवसाय द्वारा जीवन निर्वाह करते थे। गहपति प्राय: साधन सम्पन्न व्यक्ति होते थे।

  • गहपति चंद लुहार ने गौतम बुद्ध और उनके अनुयायियों को भोजन कराया था।
  • इसी प्रकार कुम्भकार सद्दलपुत्र पाँच सौ कुम्भकारों की दुकानों का मालिक था।
  • गहपति सद्दलपुत्र के यहाँ असंख्य कुम्भकार काम करते थे।
  • एक सहस्त्र लुहारों के गाँव का प्रधान भी गहपति था, जिसने बोद्धिसत से अपनी कन्या का विवाह किया था।[1]


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भारतीय संस्कृति कोश, भाग-2 |प्रकाशक: यूनिवर्सिटी पब्लिकेशन, नई दिल्ली-110002 |संपादन: प्रोफ़ेसर देवेन्द्र मिश्र |पृष्ठ संख्या: 279 |

  1. अंगुतर निकास, पृ. 363, दीघनिकाय, पृ. 126, उवासग, पृ. 184, जातक, पृ. 281 (रामशरण शर्मा : शूद्रों का प्राचीन इतिहास, पृ. 91)

टीका टिप्पणी और संदर्भ

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