सरवरिया  

सरवरिया कान्यकुब्ज ब्राह्मणों की एक उपशाखा। सरवरिया ब्राह्मणों का नाम प्राचीन नदी सरयू पर पड़ा है, जिसके पूर्व में वे मुख्यतः पाए जाते हैं। वह कन्नौजियों की प्रांतीय शाखा है और अब वे कन्नौजियों से विवाह नहीं करते। सामान्यतः सरवरियों के उप-विभजन वैसे ही हैं, जैसे कि कन्नौजियों में पाए जाते हैं।[1]

  • पंच गौड़ ब्राह्मणों- 'गौड़', 'सारस्वत', 'कान्यकुब्ज', 'मैथिल' और 'उत्कल' में कोई स्वतंत्र शाखा नहीं है।[2]
  • ‘सरवरिया’ शब्द ‘सरयू पारीण’ का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ है ‘सरयू नदी के (उत्तर) पार रहने वाला’। यह शुद्ध भौगोलिक नाम है।
  • मध्य युग में वर्जनशीलता और संकीर्णता के कारण वर्णों और जातियों की छोटी-छोटी क्षेत्रीय शाखाएँ और उपशाखाएँ बन गईं। उन्हीं में से सरयू पारीण (सरवरिया) भी एक थी।
  • इस समय सरवरिया केवल सरयू पार में सीमित न रह कर देश के कई प्रांतों में फैले हुए हैं।
  • मध्य प्रदेश से अलग हुए छत्तीसगढ़ में इनकी बहुत बड़ी संख्या है, जो अपने को ‘छत्तीसगढ़ी’ कहते हैं।


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. जातिप्रथा का अभिशाप, भीमराव अम्बेडकर (हिन्दी) हिन्दी समय। अभिगमन तिथि: 21 अगस्त, 2014।
  2. हिन्दू धर्मकोश |लेखक: डॉ. राजबली पाण्डेय |प्रकाशक: उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान |पृष्ठ संख्या: 662 |

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