मोहिन्दर अमरनाथ  

मोहिन्दर अमरनाथ
मोहिन्दर अमरनाथ
व्यक्तिगत परिचय
पूरा नाम मोहिन्दर अमरनाथ भारद्वाज
अन्य नाम 'जिम्मी' (उपनाम)
जन्म 24 सितम्बर, 1950
जन्म भूमि पटियाला, पंजाब
अभिभावक लाला अमरनाथ
खेल परिचय
बल्लेबाज़ी शैली दाएँ हाथ के बल्लेबाज़
गेंदबाज़ी शैली दाहिने हाथ के मध्यम तेज़ गेंदबाज़
टीम भारत
भूमिका बल्लेबाज, गेंदबाज़
पहला टेस्ट 24 दिसम्बर, 1969, ऑस्ट्रेलिया के विरुद्ध
आख़िरी टेस्ट 11 जनवरी, 1988, वेस्टइंडीज के विरुद्ध
पहला वनडे 7 जून, 1975, इंग्लैंड के विरुद्ध
आख़िरी वनडे 30 अक्टूबर, 1989, वेस्टइंडीज के विरुद्ध
कैरियर आँकड़े
प्रारूप टेस्ट क्रिकेट एकदिवसीय अन्तर्राष्ट्रीय टी-20 अन्तर्राष्ट्रीय
मुक़ाबले 69 85 0
बनाये गये रन 4378 1924 0
बल्लेबाज़ी औसत 42.50 30.54 0
100/50 11/24 2/13 0
सर्वोच्च स्कोर 138 102 0
फेंकी गई गेंदें 3676 2730 0
विकेट 32 46 0
गेंदबाज़ी औसत 55.69 42.85 0
पारी में 5 विकेट 0 0 0
मुक़ाबले में 10 विकेट 0 0 0
सर्वोच्च गेंदबाज़ी 4/63 3/12 0
कैच/स्टम्पिंग 47/0 23/0 0
बाहरी कड़ियाँ मोहिन्दर अमरनाथ के क्रिकेट आंकड़े
अद्यतन

मोहिन्दर अमरनाथ भारद्वाज (अंग्रेज़ी: Mohinder Amarnath Bhardwaj ; जन्म- 24 सितम्बर, 1950, पटियाला, पंजाब) भारत के ख्यातिप्राप्त पूर्व क्रिकेटरों (1969-1989) में से एक हैं। वर्तमान समय वे क्रिकेट जैसे लोकप्रिय खेल के विश्लेषक हैं। मोहिन्दर अमरनाथ 'जिम्मी' के नाम से भी जाने जाते हैं। अपने समय के तेज़ गेंदबाजों का सामना करने में मोहिन्दर अमरनाथ सबसे माहिर माने जाते थे। वे भारत के प्रथम कप्तान लाला अमरनाथ के पुत्र हैं। इनके भाई सुरिन्दर अमरनाथ टेस्ट क्रिकेट खिलाड़ी और राजिन्दर अमरनाथ प्रथम श्रेणी क्रिकेट के खिलाड़ी रहे हैं। मोहिन्दर अमरनाथ वर्ष 1983 में भारत की पहली विश्व कप जीत के नायक थे।

जन्म

मोहिन्दर अमरनाथ का जन्म 24 सितम्बर, 1950 को पंजाब राज्य के पटियाला ज़िले में हुआ था। इनके पिता भारत के प्रसिद्ध क्रिकेट खिलाड़ी लाला अमरनाथ थे, जिन्होंने क्रिकेट की बुलंदियों को छुआ था। लाला अमरनाथ ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत की ओर से पहला शतक जमाया था। वे भारत के पहले आलराउंडर थे, जिन्होंने बल्ले के अलावा गेंद से भी अपने विरोधियों की नाक में दम कर दिया था। आगे चलकर यही कार्य मोहिन्दर अमरनाथ ने भी किया।

पारिवारिक पृष्ठभूमि

भारत के लिये पहला टेस्ट शतक जमाने वाले लाला अमरनाथ भारतीय क्रिकेट के महानतम खिलाडि़यों में से एक थे। लाला अमरनाथ के बाद उनके बड़े बेटे सुरिन्दर अमरनाथ ने भारतीय स्कूली लड़कों की टेस्ट टीम की कप्तानी की और बाद में अपने पिता की तरह पहले टेस्ट में शतक बनाया। दोनों के नाम पहले ही टेस्ट में शतक जमाने का रिकार्ड है। बाद में मोहिन्दर अमरनाथ ने क्रिकेट में पदार्पण किया, जो 1983 में भारत की पहली विश्व कप जीत के नायक रहे। अब अमरनाथ परिवार की तीसरी पीढ़ी भी क्रिकेट के मैदान पर उतर चुकी है, जब सुरिन्दर अमरनाथ के 22 वर्ष के बेटे दिग्विजय अमरनाथ ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया।[1]

क्रिकेट की शुरुआत

मोहिन्दर अमरनाथ ने वर्ष 1969 में अपना पहला प्रदर्शन एक तेज़ गति के गेंदबाज़ के साथ एक त्वरित हरफनमौला खिलाड़ी के रूप में किया था, लेकिन अपने कैरियर के सर्वोच्च शिखर पर वे हमेशा एक शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ के रूप में आये, जिन्होंने हमेशा भारत के लिए नंबर तीन पर खेला। वे गेंदबाज़ी में भी कुशल थे और गेंद को बड़े कौशल और नियंत्रण के साथ स्विंग और कट करते थे।

प्रथम शतक

मोहिन्दर अमरनाथ ने अपना पहला शतक ऑस्ट्रेलिया के पर्थ मेें लगाया था। उस समय कंगारू टीम में जैफ थॉमसन जैसा तेज़ रफ्तार का बादशाह शामिल था। पर्थ की पिच को विश्व की सबसे अधिक उछाल और तेज़ पिच कहा जाता है। इसके बाद मोहिन्दर अमरनाथ ने टेस्ट क्रिकेट में 10 और शतक लगाए। 1982-1983 में पाकिस्तान के विरुद्ध पांच टेस्ट मेचों की शृंखला में भारत को 3-0 से शिकस्त झेलनी पड़ी थी, उसमें भी अमरनाथ का प्रदर्शन कमाल का था और वे इमरान ख़ान के साथ संयुक्त रूप से 'मैन ऑफ़ द सीरिज' रहे थे। पाकिस्तान और वेस्टइंडीज के विरुद्ध खेले 11 टेस्ट में उन्होंने 1000 रन बनाए थे। उन्होंने 69 टेस्ट में 42.50 की औसत से 4378 रन बनाए और 32 विकेट भी झटके। जबकि 85 वनडे में 30.54 की औसत 1924 रन बनाए और 46 विकेट झटके।[2]

विश्व कप में प्रदर्शन

मोहिन्दर अमरनाथ को 'क्रिकेट विश्व कप-1983' में उनके सफल प्रदर्शन के लिए जाना जाता है। फाइनल और सेमीफाइनल मैच में उन्हें मैन ऑफ द मैच' के खिताब से सम्मानित किया गया था। इस तरह उन्होंने भारत का अपने पहले एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय खिताब के लिए नेतृत्व किया। मोहिन्दर अमरनाथ ने अपनी सटीक और तेज़ गेंदबाजी से इंग्लैंड के ख़िलाफ़ सेमीफाइनल में डेविड गोवर और माइक गैटिंग जैसे शीर्ष क्रम के बल्लेबाज़ों के विकेट लिए थे। उस समय उन्होंने औसतन 2.25 प्रति ओवर के अनुसार अपने 12 ओवरों में मात्र 27 रन ही दिए थे। यह सभी भारतीय गेंदबाजों द्वारा दिए गए रनों में सबसे कम थे। यदि बल्लेबाज़ी की बात की जाये तो उन्होंने 46 रन बनाकर भारत को ठोस शुरुआत देने का कार्य किया था।

फ़ाइनल मैच में भारत ने वेस्ट इंडीज के विरुद्ध पहले बल्लेबाज़ी की, जो विवादास्पद रूप से दुनिया की सबसे अच्छी गेंदबाजी का दावा करता है। टीम अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई और 54.4 ओवरों में मात्र183 रन पर ही सिमट गई और निर्धारित 60 ओवर भी पूरे नहीं खेल सकी। इस समय वेस्टइंडीज की घातक तेज़ गेंदबाज़ी के आगे मोहिन्दर अमरनाथ की शान्त और तटस्थ बल्लेबाज़ी ने भारतीय पारी को काफ़ी हद तक स्थिरता दिलाई। भारतीय खिलाड़ियों में मात्र वे ही सबसे अधिक समय तक पिच पर टिके रहे। मोहिन्दर अमरनाथ ने 80 गेंदों का सामना किया और 26 रन बनाए। यद्यपि सीमित ओवरों के मैच में क्रीज़ पर लम्बे समय तक टिके रहने को आवश्यक रूप से अच्छी बात नहीं कहा जा सकता, किंतु यह देखते हुए की भारत पूरे 60 ओवरों की पारी नहीं खेल पाया था, अमरनाथ की पारी ने साथ खेलने वाले दूसरे बल्लेबाज़ों को स्कोर बनाने का मौका दिया।

सर्वाधिक 38 रन क्रिस श्रीकांत ने, 27 रन संदीप पाटिल ने 26 रन अमरनाथ ने बनाये थे। अपनी खराब बल्लेबाज़ी के प्रदर्शन के बाद भारत की जीत की संभावना लगभग समाप्त-सी हो गई थी, हालांकि भारतीय गेंदबाजों ने मौसम और पिच की स्थिति का भरपूर फायदा उठाते हुए वेस्ट इंडीज की टीम को 140 रनों पर आउट कर दिया और इस प्रकार 43 रन से फाइनल मैच जीत लिया। मोहिन्दर अमरनाथ और मदनलाल संयुक्त रूप से सर्वाधिक विकेट लेने वाले खिलाड़ी रहे। प्रत्येक ने तीन-तीन विकेट लिए थे। सेमीफाइनल की तरह ही फाइनल मैच में भी मोहिन्दर अमरनाथ एक बार फिर सबसे सफल गेंदबाज सिद्ध हुए थे। उन्होंने प्रति ओवर 1.71 रनों के औसत से अपने सात ओवरों में केवल 12 रन दिए। इस प्रकार उन्हें सेमीफाइनल की तरह फिर से 'मैन ऑफ़ द मैच" घोषित किया गया।

दिलचस्प प्रसंग

मोहिन्दर अमरनाथ के साथ कई उल्लेखनीय प्रसंग भी जुड़े हुए हैं, जैसे-

  • क्रिकेट के पिच से लेकर डांस के मंच तक वे अपने जलवे बिखेर चुके हैं। वर्ष 2009 में मोहिन्दर अमरनाथ डांस रियलटी शो "झलक दिखला जा" में भी आए थे। इस शो के जरिए वे डांस की धुनों पर लोगों को नचाने में कामयाब रहे, लेकिन वे जल्द ही इस शो से बाहर भी हो गए। उनके बाहर होने के बाद शो की टीआरपी में काफ़ी गिरावट आ गई थी।
  • मोहिन्दर अमरनाथ का टीम इंडिया के चयनकर्ता के रूप में कार्यकाल विवादों में रहा। कई मौकों पर उन्होंने महेन्द्र सिंह धोनी की आलोचना की, जिस पर बीसीसीआई से उनकी ठन गई। साथ ही वीरेन्द्र सहवाग को टीम से निकाले जाने का भी उन्होंने विरोध जताया था।
  • वे विश्व के एकमात्र ऐसे क्रिकेट खिलाड़ी हैं, जो "हैंडलिंग द बॉल" और "ऑब्सट्रक्टिंग द फ़ील्ड" के जरिए आउट हो चुके हैं।[2]
  • मोहिन्दर अमरनाथ को भारतीय क्रिकेट में वापसी करने के लिए जाना जाता है। अपने कैरियर के दो दशकों में जब वे शिखर पर थे, तब उन्हें भारतीय टीम से कई मौकों पर निकला गया और हर बार उन्होंने अपनी वापसी अपने उत्कृष्ट खेल के द्वारा प्राप्त की।
  • अपनी पहली श्रृंखला के बाद उन्हें टीम में वापस आने के लिए 1975 तक इंतजार करना पड़ा था।

महान क्रिकेटरों के विचार

1983 के क्रिकेट विश्व कप सेमीफाइनल और फाइनल में मोहिन्दर अमरनाथ के प्रदर्शन ने भारत को पहली बार एकदिवसीय क्रिकेट का बादशाह बनाया था। पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और तेज़ गेंदबाज़ इमरान ख़ान उन्हें दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़ मानते थे। अपनी किताब में भी इमरान ख़ान ने मोहिन्दर अमरनाथ की बल्लेबाज़ी की प्रशंसा की है। वहीं वेस्ट इंडीज के तेज़ गेंदबाज मेल्कम मार्शल भी उनके साहस के मुरीद थे। भारत के दिग्गज बल्लेबाज़ सुनील गावस्कर ने भी अपनी किताब में मोहिन्दर अमरनाथ को बेहतरीन बल्लेबाज़ बताया। उन्हें टीम इंडिया का "कमबैक मैन" भी कहा जाता है। जब भी उन्हें टीम से ड्रॉप किया जाता, वे धमाकेदार प्रदर्शन कर टीम में जगह बनाते।[2]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. अमरनाथ परिवार की तीसरी पीढ़ी का क्रिकेट में पदार्पण (हिन्दी) पी-7 न्यूज। अभिगमन तिथि: 24 सितम्बर, 2014।
  2. 2.0 2.1 2.2 मोहिंदर अमरनाथ: 1983 वर्ल्ड कप के हीरो "झलक दिखला जा "में भी नाच चुके हैं (हिन्दी) पत्रिका। अभिगमन तिथि: 24 सितम्बर, 2014।

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