"कनकमुनि": अवतरणों में अंतर
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'''कनकमुनि''' [[गौतम बुद्ध]] के पूर्ववर्ती एक बुद्ध | {{पात्र परिचय | ||
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'''कनकमुनि''' [[गौतम बुद्ध]] के पूर्ववर्ती एक बुद्ध थे। उनका नाम बौद्ध मान्यता के अनुसार कनकमुनि इसलिए हुआ, क्योंकि इनके जन्म के समय [[जंबूद्वीप]] भर में [[स्वर्ण]] [[वर्षा]] हुई थी। प्राचीन [[बौद्ध साहित्य]] में गौतम बुद्ध के छह पूर्ववर्ती बुद्धों तथा तथागतों में इनका उल्लेख मिलता है। ये [[प्रागैतिहासिक काल|प्रागैतिहासिक युग]] के माने जाते हैं। <ref name="nn">{{cite web |url=http://bharatkhoj.org/india/%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A4%95%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF |title=कनकमुनि|accessmonthday=20 जुलाई|accessyear=2015|last= |first= |authorlink= |format= |publisher=भारतखोज|language=हिन्दी}}</ref> | |||
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12:22, 25 अक्टूबर 2017 के समय का अवतरण
कनकमुनि
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| अन्य नाम | 'कोनाकमुनि', 'कोनाकमन' |
| पिता | सैन्यदत्त |
| माता | उत्तरा |
| जन्म विवरण | सोदवती |
| समय-काल | गौतम बुद्ध के पूर्ववर्ती |
| धर्म-संप्रदाय | बौद्ध |
| संबंधित लेख | बौद्ध धर्म, गौतम बुद्ध, भिक्कु, बौद्ध चिन्तन |
| अन्य जानकारी | अपने पुत्र के जन्म के पश्चात् ही कनकमुनि अपने 30,000 अनुयायियों के साथ राज्य छोड़कर चले गये और उन्होंने भिक्षु धर्म स्वीकार कर लिया। |
कनकमुनि गौतम बुद्ध के पूर्ववर्ती एक बुद्ध थे। उनका नाम बौद्ध मान्यता के अनुसार कनकमुनि इसलिए हुआ, क्योंकि इनके जन्म के समय जंबूद्वीप भर में स्वर्ण वर्षा हुई थी। प्राचीन बौद्ध साहित्य में गौतम बुद्ध के छह पूर्ववर्ती बुद्धों तथा तथागतों में इनका उल्लेख मिलता है। ये प्रागैतिहासिक युग के माने जाते हैं। [1]
- कनकमुनि का जन्म स्थान सोदवती था। उनके पिता सैन्यदत्त और माता उत्तरा थीं।
- गौतम बुद्ध के आविर्भाव के विषय में कनकमुनि ने भविष्यवाणी भी की थी। कुछ काल की तपस्या के पश्चात् उन्हें बोधिसत्व अथवा ज्ञान प्राप्त हो गया।
- 'महावस्तु', 'कर्मविभंग' आदि कुछ ग्रंथों में इनका 'कोनाकमुनि' अथवा 'कोनाकमन' के नाम से भी उल्लेख किया गया है।
- मेजर फ़ोर्ब्स ने गौतम बुद्ध के पूर्ववर्ती तीन बुद्धों का काल निर्धारण करने का प्रयत्न किया है।[2]
- अपने पुत्र के जन्म के पश्चात् कनकमुनि अपने 30,000 अनुयायियों के साथ राज्य छोड़कर चल पड़े और उन्होंने भिक्षु धर्म स्वीकार कर लिया।
- उनके अनुसार क्रकुच्छंद 3101 ईसा पूर्व बुद्ध हुए थे। इस काल गणना के अनुसार कनकमुनि ने 2099 ईसा पूर्व और काश्यप ने 1014 ईसा पूर्व बुद्धत्त्व की प्राप्ति की थी।
- कनकमुनि का 'मंजुश्री मूलकल्प', 'दिव्यावदान', 'महावस्तु', 'लंकावतार', 'ललितविस्तर', 'कर्मविभंग' आदि अनेक प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में अन्य तथागतों, विशेष रूप से क्रकुच्छंद और काश्यप के साथ उल्लेख हुआ है।
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टीका टिप्पणी और संदर्भ
संबंधित लेख
