बसरा  

बसरा इराक़ में बग़दाद के बाद दूसरा सबसे बड़ा शहर है, जो कभी अपनी हूरों, सच्चे मोतियों और शत अल शरब दरिया के किनारे बसे होने के कारण खूबसूरती के लिए मशहूर था। यह नगर एक महत्त्वपूर्ण बंदरगाह भी है। इसके साथ ही यह बसरा पांत की राजधानी है।

स्थिति

बसरा फ़ारस की खाड़ी से 75 मील की दूरी पर तथा बग़दाद से 280 मील की दूरी पर दक्षिण-पूर्वी भाग में दज़ला-फरात नदियों के मुहाने पर बसा हुआ है। यह 30° 30' उत्तरी अक्षांश तथा तथा 47° 50' पूर्वी देशान्तर पर स्थित है।

इतिहास

इस शहर को सर्वप्रथम ख़लीफ़ा उमर ने लगभग 636 ईसा बाद बसाया था। "अरेबियन नाइट्स" नामक पुस्तक में इसकी संस्कृति, कला तथा वाणिज्य के विषय में बड़ा सुंदर वर्णन किया गया है। सन 1868 में तुर्कों के अधिकार करने पर बसरा की अवनति होती गई। लेकिन ब्रिटेन का अधिकार जब प्रथम विश्वयुद्ध में हुआ, उस समय उन्होंने इसको एक अच्छा बंदरगाह बनाया और कुछ ही समय में यह इराक़ का एक महत्वपूर्ण बंदरगाह बन गया। यहाँ ज्वार के समय 26 फुट ऊपर तक पानी चढ़ता है।

अन्य तथ्य

  • बसरा से देश की 90 प्रतिशत वस्तुओं का निर्यात किया जाता है। यहाँ से ऊन, कपास, खजूर, तेल, गोंद, गलीचे तथा जानवर निर्यात किए जाते हैं।
  • बसरा जाने के लिए सबसे आसान रास्ता कुवैत होकर है।
  • उम्म क़स्र से बसरा लगग 60-70 कि.मी. दूर है और जहां तक नज़र जाती है, पूरा इलाक़ा वीरान और रेगिस्तान नज़र आता है।
  • यहाँ की जनसंख्या में अधिकांश अरब, यहूदी, अमरीकी, ईरानी तथा भारतीय हैं।


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