नील व्रत

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  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • एक वर्ष तक प्रतिदिन नक्त विधि से खाना खाया जाता है।
  • संवत्सर व्रत चलता है।
  • अन्त में नीलकमल के साथ शक्कर से युक्त एक पात्र एवं एक बैल का दान दिया जाता है।
  • कर्ता विष्णुलोक को पाता है।[1]
  • मत्स्य पुराण ने इसे 'लीलाव्रत' की संज्ञा दी है।

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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. मत्स्य पुराण (101|5); कृत्यकल्पतरु (440, तीसरा षष्टीव्रत); हेमाद्रि (व्रतखण्ड 2, 865, पद्म पुराण 5|20|47-48 से उद्धरण

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