पुत्रीय सप्तमी

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  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की सप्तमी पर यह व्रत किया जाता है।
  • सूर्य की पूजा की जाती है।
  • उस दिन केवल हविष्य भोजन करना चाहिए।
  • दूसरे दिन गन्ध से आरम्भ कर अन्य उपचारों से सूर्य पूजा तथा नक्त भोजन (दिन भर कुछ नहीं केवल रात्रि में ही एक बार भोजन)।
  • एक वर्ष तक यह व्रत किया जाता है।[1]
  • "पुत्रीय" का अर्थ है 'जो पुत्र लाभ कराता है'।


टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि (व्रतखण्ड 1, 789-90, विष्णुधर्मोत्तरपुराण से उद्धरण)।

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