ख़ून के हाथ रँगना  

ख़ून के हाथ रँगना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है।

अर्थ- हत्या करना।

प्रयोग- इसी दलाली के लिए हम एक दूसरे के ख़ून से अपने हाथ रँगते है। (प्रेमचंद)

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

कहावत लोकोक्ति मुहावरे वर्णमाला क्रमानुसार खोजें

                              अं                                                                                              क्ष    त्र    श्र

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=ख़ून_के_हाथ_रँगना&oldid=625061" से लिया गया