बिजली की तरह कड़कना  

बिजली की तरह कड़कना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है।

अर्थ- रोष पूर्वक बिगड़ना।

प्रयोग- आज तो तुम बिना बात के ही बिजली की तरह कड़क रहे हो।

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

कहावत लोकोक्ति मुहावरे वर्णमाला क्रमानुसार खोजें

                              अं                                                                                              क्ष    त्र    श्र

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=बिजली_की_तरह_कड़कना&oldid=625231" से लिया गया