भड़क जाना  

भड़क जाना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है।

अर्थ- आशंका, विरोध, भय आदि के कारण क्रुद्ध हो जाना।

प्रयोग- मैंने तो चंपा से अभी कुछ पूछा भी नहीं, तुम तो उसे जानती हो, कहीं इसे देखकर भड़क गई तब। (शिवानी)

टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

कहावत लोकोक्ति मुहावरे वर्णमाला क्रमानुसार खोजें

                              अं                                                                                              क्ष    त्र    श्र

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=भड़क_जाना&oldid=625992" से लिया गया