गला भर्राना  

गला भर्राना एक प्रचलित लोकोक्ति अथवा हिन्दी मुहावरा है।

अर्थ- गला भर आना, किसी कारण आवाज़ न निकलना।

प्रयोग- मालती का गला भर्रा गया और उसने मुँह फेरकर रूमाल से आँसू पोछे। -प्रेमचंद


टीका टिप्पणी और संदर्भ

संबंधित लेख

कहावत लोकोक्ति मुहावरे वर्णमाला क्रमानुसार खोजें

                              अं                                                                                              क्ष    त्र    श्र

वर्णमाला क्रमानुसार लेख खोज

                              अं                                                                                                       क्ष    त्र    ज्ञ             श्र   अः



"https://bharatdiscovery.org/bharatkosh/w/index.php?title=गला_भर्राना&oldid=625932" से लिया गया