दशादित्य व्रत  

  • भारत में धार्मिक व्रतों का सर्वव्यापी प्रचार रहा है। यह हिन्दू धर्म ग्रंथों में उल्लिखित हिन्दू धर्म का एक व्रत संस्कार है।
  • यह रविवार वाली शुक्ल पक्ष की दशमी को किया जाता है।
  • दस गाँठों वाले डोरक के रूप में भास्कर (सूर्य) की पूजा की जाती है।
  • इस व्रत से दस कर्मों से उत्पन्न दुर्दशा का निवारण हो जाता है।
  • दस रूपों में दुर्दशा की मूर्ति तथा दस रूपों में लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा की जाती है।[1]


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टीका टिप्पणी और संदर्भ

  1. हेमाद्रि व्रतखण्ड 2, 549-552

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